मेरी हिन्दी प्यारी

     मेरी हिंदी प्यारी 
--------------------
माँ ने सिखाई 
अध्यापकों ने सुधारी
मन की बात कहने में समर्थ 
मेरी दादी की प्यारी ।
खुशबूदार फूलों की क्यारी ।।
ऐसी है मेरी हिंदी प्यारी ।।

साधन सबसे जुड़ने का 
चाहे अपने अनजान से
देश में हर प्रांत से 
भावनाओं को करती वहन
दूरियों का करती दमन
खुशबूदार फूलों की क्यारी ।।
ऐसी है मेरी हिंदी प्यारी ।।
बहुत अपनी सी
जैसे हमारा पैतृक मकान ।
सौम्यता बुजुर्ग सी
जैसे रूह की पहचान 
खुशबूदार फूलों की क्यारी ।।
ऐसी है मेरी हिंदी प्यारी ।।
उर्दू सा रस घोले मधु सा ।
संस्कृत की सी विद्वता ।
वैर-भाव नहीं तनिक सा ।
देखो! खातिर तुम्हारे 
अंग्रेजी को भी छू लिया ।
खुशबूदार फूलों की क्यारी ।।
ऐसी है मेरी हिंदी प्यारी ।।
कब तक कोसोगे ।
और कितना दूर जाओगे ।
माना माँ है मातृ भाषा हमारी ।
हर प्रांत के जन की प्यारी ।
खुशबूदार फूलों की क्यारी ।।
ऐसी है मेरी हिंदी प्यारी ।।
परिवार चाहे कितना ही बढ़ जाए ।
पर क्या कुटुंब को छोड़ जाओगे ।।
माँ को पूजो,मानो 
पर 
दादी को कैसे भूल जाओगे ।।
खुशबूदार फूलों की क्यारी ।।
ऐसी है मेरी हिंदी प्यारी ।।         
                    मुक्ता शर्मा
                ----------------

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/09/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 15/09/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2018

Leave a Reply