हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में

दिखाने को सबको पकड़ खड़े अजगर , इसको छोड़ो तो अमृत मिल जायेगा

दूसरों की देखा देखी फाड़ जो चरित्र लिया , भूला लौट आये तो चरित्र सिल जायेगा

7-8 दशक बीत गए लेकिन अब भी , रंग सब पर ये विदेशी ही चढ़ा हुआ है

छोड़ो अब विदेशियों को अपनाओ देशियों को , इससे हिंदी माता का आँचल खिल जायेगा

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

#हिंदी_दिवस_की_हार्दिक_शुभकामनायें

“वक्त के बदलते रंग में जीवन की अंतिम साँसों तक हमे माँ हिंदी की सेवा करनी है”

यही प्रत्येक भारतीय और हिंदी माँ के बेटे-बेटियों का कर्तव्य है

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/09/2018

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