हे विघ्नहरण गौरीलाल

हे विघ्नहरण गौरीलाल,

जनक जिनके है महाकाल

रूखे जिनके बिन सुर व ताल,

दूर करते है जो अकाल

हो रिद्धि-सिद्धि के तुम स्वामी,

हो सकल जग में सबसे ज्ञानी

तुमसे जीवन की ज्योति है,

तुमसे सुख की अनुभूति है

तुमसे ही सारे विघ्न कटें,

तुमसे ही सारे कष्ट मिटे

हे प्रभु करके दृष्टि हम पर , खुशियों की रसधार भरो

हे एकदंत महादेव पुत्र , मानव जीवन पर कृपा करो

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

Leave a Reply