उसी खुमार में – शिशिर मधुकर

तड़प रही है तू जो मेरे इंतज़ार में
मैं भी फना हुआ हूँ एक तेरे प्यार में

तेरे लब ने छू लिए जैसे ये लब मेरे
लाख फूल खिल गए है सूखे ख़ार में

सांस तेरी चल रही है देख इस तरह
खुशबू सी बस गई है ठंडी बयार में

तन अलग हो चाहें पर मन तो एक है
दम नहीं है कोई भी अब इस दीवार में

जाम जो भी पी लिए हैं आँखों से तेरी
मधुकर तो आज भी है उसी खुमार में

शिशिर मधुकर

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/09/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 15/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2018

Leave a Reply