किसी को फर्क क्या – शिशिर मधुकर

मुहब्बत इंसान की इंसान से जब टूट जाती है
लाख कोशिश करो ये कभी वापस न आती है

तूने घायल किया मैंने तेरे से प्यार जब माँगा
मेरे दिल की सदा अब नाम तेरा ना बुलाती है

किसी को फ़र्क क्या तूने ही बढ़ पा के यहाँ खोया
मुझे अपमान की बोली तेरी वो ना भुलाती है

चाहे तुम दूर रहते हो चाहे तुम पास रहते हो
विरह या बात मिलने की मुझे तो ना रूलाती है

पता चल जाता है सबको देख के रंग चेहरे का
झूठी सूरत कभी उल्फ़त को मधुकर न जतातीं है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/09/2018

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