बारूद का ढेर

बारूद का ढेर
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जनसंख्या बनी बारूद का ढेर।
संभालो कहीं ना हो जाए देर।
तीन प्रतिशत मात्र भूमि का हिस्सा ।
सत्रह प्रतिशत जनता का किस्सा ।
संसाधनों का नित लुट रहा कुबेर।
जनसंख्या बनी बारूद का ढेर ।
संभालो कहीं ना हो जाए देर।

हरित क्रांति ने हरियाली फैलाई।
कृषि उत्पादकता बढ़ी है भाई!
तो क्यों कुछे चेहरे पीले-कनेर?
जनसंख्या बनी बारूद का ढेर ।
संभालो कहीं ना हो जाए देर ।

बेरोजगारी ने तांडव मचाया।
प्रगति-समर्थ को विदेश पहुँचाया ।
पल-पल बढ़ता अपराध का अंधेर।
जनसंख्या बनी बारूद का ढेर ।
संभालो कहीं ना हो जाए देर ।

जल और वायु में हलाहल समाया।
चिकित्सा जगत भी इससे घबराया।
खोए सब घरों में, विनाश मुंडेर ।
जनसंख्या बनी बारूद का ढेर ।
संभालो कहीं ना हो जाए देर ।

शानौ-शौकत सब ऊपरी आडंबर।
प्रयत्न तुम्हारे गधे पर वाघंबर।
विस्फोट का, दहाड़ता भूखा शेर ।
जनसंख्या बनी बारूद का ढेर ।
संभालो कहीं ना हो जाए देर ।
।।मुक्ता शर्मा ।।

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2018
    • mukta mukta 10/09/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/09/2018
    • mukta mukta 10/09/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/09/2018

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