जीवन का ये खेल निराला – शिशिर मधुकर

दिल की बातें सब से कहना मुश्किल होता है
तन्हाई में अक्सर ये इंसान घुट घुट के रोता है

मोह माया से कौन बचा है बात करो कुछ भी
बीज जहाँ में बंधन के मानव खुद ही बोता है

खुशियां मिलती हैं जिनसे वो दिल में बसते हैं
चरण कमल उनके इंसा निज कर से धोता है

जिसने साध लिया इच्छा को जीत गया जग वो
ऐसा इंसान तो हरदम चैन की नींद में सोता है

जीवन का ये खेल निराला समझ ले तू मधुकर
इंसान यहाँ हर पल में कुछ पाता और खोता है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2018

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