सच्ची सफलता

निचली डाल के वो फल।।
अंजुली में भरा ये जल।।
देते सफलता का भास।।
कि अब मिट जाएगी भूख।
कि अब मिट जाएगी प्यास।।
पर क्षणिक है यह उल्लास ।।
है बस कुछ पलों की बात।
यहां तलक तो चौपाए
भी जोर लगा लेते हैं ।।
लटकते हुए उस फल को
उचक कर खा लेते हैं ।।
तू मानव, बन तपस्वी
तू कर ले कुछ साधना।।
उद्देश्य कुछ दूर बना।।
स्वप्न कुछ खास सजा।।
फुनगी पे सजे सुंदर ।।
पके फल जो हैं मधुर ।।
कर प्रयत्न, साध साध्य
कुछ दूर और कदम बढ़ा ।।
अरे! सौ सुनार की छोड़
बस लुहार सी चोट लगा।।

।।मुक्ता शर्मा ।।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/09/2018
  2. mukta mukta 10/09/2018

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