रूठा वक़्त

गिले इन लबों के खत्म ना कर सकेगें,
सिलसिलो के रुख बदल ना सकेगें।
ये आइने भी कभी दिल नही पढते,
और हम आइने कभी पलट न सकेगे।।
गिले इन लबों के खत्म ना कर सकेगें।।
महज़ कुछ बातों को तो उतार दिया,
कभी आँखो के दरिया को उतार न सकेगे। ।
राहें भी हमारी है, मंजिलें भी हमारी है,
फिर भी मुसाफ़िर इनके बन ना सकेगें।
गिले इन लबों के खत्म ना कर सकेगें।
आँखे के साथ वक़्त भी साथ है,
फिर भी अपने ही खवाबों के
हक़दार हम हो न सकेगें।।

अजंली

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2018
    • अंजली यादव Anjali yadav 04/09/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 04/09/2018
  3. अंजली यादव Anjali yadav 04/09/2018
  4. Saviakna Saviakna 04/09/2018
    • अंजली यादव Anjali yadav 05/09/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 05/09/2018
    • अंजली यादव Anjali yadav 05/09/2018
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/09/2018
    • अंजली यादव Anjali yadav 05/09/2018
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 06/09/2018

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