बाँसुरी तान फिर छेड़ जाओ

प्रेम ज्ञान दिया स्वामी तुमने , कैसे तुमको न प्यार करे

तुम जीवन पथ प्रदर्शक का , हम मिलजुल कर त्यौहार करें

हे प्रभु ज्ञान पर चढ़ते तम पर , बाँसुरी तान फिर छेड़ जाओ

पथ प्रकाशित करो सारथी , हम भाव सागर को पार करें

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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