मेरा मन वृंदावन

।।मेरा मन वृंदावन ।।
मोहन मुरली तुम्हारी प्यारी।
सुध बिसराई मोरी सारी।
कान्हा-कान्हा जपूं निसदिन।
कृष्णा मेरा मन वृंदावन ।।

देखो गैयां खूब संवारी।
गूंजी कहीं बांसुरी न्यारी।
कान्हा-कान्हा जपूं निसदिन।
कृष्णा मेरा मन वृंदावन ।।

दूध-दहीं की बह रही धारी।
मखनी-मिश्री तो देखो प्यारी ।
कान्हा-कान्हा जपूं निसदिन ।
कृष्णा मेरा मन वृंदावन ।।

बांवरी तेरी मैं बनवारी।
भर दो अब तो दरस क्यारी।
कान्हा-कान्हा जपूं निसदिन ।
कृष्णा मेरा मन वृंदावन ।।

पहन के निकली सुंदर सारी।
निधि वन जाने की तैयारी ।
कान्हा-कान्हा जपूं निसदिन ।
कृष्णा मेरा मन वृंदावन ।।

पलक झपकूं ना डर की मारी।
छोड़ न देना मुझे गिरधारी।
कान्हा-कान्हा जपूं निसदिन ।
कृष्णा मेरा मन वृंदावन ।।
।।मुक्ता शर्मा ।।

11 Comments

    • mukta mukta 05/09/2018
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2018
    • mukta mukta 05/09/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 03/09/2018
    • mukta mukta 05/09/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/09/2018
    • mukta mukta 05/09/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 04/09/2018
    • mukta mukta 05/09/2018
  5. mukta mukta 05/09/2018

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