सच्ची मुहब्बत – शिशिर मधुकर

सच्ची मुहब्बत गर तूने मुझ से करी होती
चुप्पी ये अपने होंठों पर न तूने धरी होती

सर पे कफ़न सजा के जो हुंकार ले लेती
तलवार ये समर में फिर तो ना डरी होती

बादल बरसने की जगह गर ताकते रहते
सूखी हुईं धरती ये फिर तो ना हरी होती

किस्मत अगर सच में ही मेरा साथ दे देती
झोली मेरी तेरे प्रेम से अब तक भरी होती

मन में अगर उसके भी कोई चोर ना होता
हर बात मधुकर फिर यहाँ उसकी खरी होती

शिशिर मधुकर

4 Comments

    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2018
  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/09/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2018

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