खुद से ही हुज्जत हो जाये

काम करते करते थक गए , अब थोड़ी फुरसत हो जाये

दिल की सुनने को फिर चाहे , खुद से ही हुज्जत हो जाये

जाने कितनों ने मुँह फेरा , कितनों से नफरत पायी है

अरे छोड़ो ये सियासी धन्धे , अब थोड़ी मोहब्बत हो जाये

कवि- मनुराज वार्ष्णेय

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  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 01/09/2018

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