नौच खाते हैं

जब गुजरती हैं गलियों से
सोचो किससे डर जाती हैं
आजकल लड़कियाँ क्यों
मर्दों से घबराती हैं

जो छोड़ कर सबकुछ अपना
बस तेरी हो जाती है
तेरे भरोसे कंधे पर सिर
रखकर सो जाती है

हम बने सहारा इनका
गलियों चाक चौराहों पर
कद्र करे साथ निभाये
जिंदगी के चौराहों पर

आज हम टीका बनकर
इनका मस्तिक सजा दे
इन तितलियों को ऊँचे
अश्मानो में उड़ना सीखा दें

दामन बनकर इनका
अस्मत इनकी बचा लें
कांटा बनकर फूलों को
आसपास अपने खिला लें

इनके बिना हम देखो
कितने अकेले हो जाते हैं
फिर क्यों मौका मिलते ही
इनको नौच खाते हैं

8 Comments

  1. पथिक 01/09/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 01/09/2018
    • rakesh kumar Rakesh kumar 02/09/2018
  3. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 01/09/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/09/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/09/2018
  6. अंजली यादव अंजली यादव 04/09/2018
  7. rakesh kumar Rakesh kumar 04/09/2018

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