वो लम्हे – शिशिर मधुकर

भले तुम दूर रहती हो मगर खुशबू तो आती है
मुझे मदहोश कर के जो यहाँ हरदम सताती है

वो नज़रें चुराना और सदा चुप से निकल जाना
ये खामोशी भी अब चीख के मुझको बुलाती है

भले ही फूल कितना भी घिरा हो बैरी कांटों से
उसकी आभा तो दिल मगर सबका लुभाती है

आस सीने में पलती है बात ख्वाबों में होती है
मुहब्बत आज भी अपना धरम पूरा निभाती है

जिस्म जो एक हो जाएं सांस में सांस मिल जाएं
मधुकर वो लम्हे ना ज़िन्दगी हरगिज़ भुलाती है

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. rakesh kumar rakesh kumar 31/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 01/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2018
  3. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 01/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2018
  5. अंजली यादव अंजली यादव 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2018

Leave a Reply