सुना है की

सुना है की
आज उसने फिर किसी से दिल लगाया है
बड़ी ही फरेबी है
ना जाने कौन फिर उसके झांसे में आया है
जुल्फे घने लहरा कर
आज फिर किसी को अँधा बनाया है
भरी महफ़िल में
आज फिर उसने किसी को रुलाया है
सुना है की
आज उसने फिर किसी से दिल लगाया है
दिल उसने शीशे का बनाया है
आज फिर उसने किसी को आईना दिखाया है
जाने आज फिर किसे पागल बनाया है
अपनी नशीली आँखों में डुबा कर
आज फिर किसी को नशे में चढ़ाया है
ये शौक ही बन गया उसका
आज फिर किसी को सीने से लगाया है
आज फिर किसी के दिल में खंजर घुसाया है
सुना है की
आज उसने फिर किसी से दिल लगाया है—अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. chandramohan kisku Chandramohan Kisku 28/08/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/08/2018

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