इंकलाब – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

इन्कलाब की मशाल जलानी होगी
कलम की ताकत अब दिखानी होगी।
हम सुधरेंगे तभी लोग सुधरेंगे
इन्कलाब का नारा तुफानी होगा ।
लोभ है शत्रु, उसको दिल से निकालो
भीतर घात कलंक मिटाना होगा।
घूसखोरों को बुला जहर पिला दो
गुनहगारों को सबक सिखाना होगा ।
मिलकर नेक बने अब जागें हम सब
ऐसी ही गीत हमें सुनानी होगी ।
लूट देश जिसने अपना घर सजाया
उसका घर हमें अब जलाना होगा।
झूठ फरेब और ये नफरत कैसी
हर एक मन से हमें मिटानी होगी।
भूल रहे हम क्यों अब भाई चारे
फर्ज सबको अपना निभाना होगा

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 28/08/2018

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