दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हिम्मत मन मैं हो अगर, तो बेड़ा हो पार
जिसमें हो विश्वास बड़ा, कभी नहीं लाचार।

करना है जो ठान लो ,हो जितना लाचार
मंजिल मिल जाती उसे,बदले नहीं विचार।

समझ गये जो चेतना, रखते उस पर ध्यान
गलती कर सकते नहीं, ऐसा है ये ज्ञान।

मन भाये जो आपका, सुंदर होता रूप
ढ़ूढ रहे दरियाव क्यों, प्यास बुझाये कूप।

भ्रात -बहन का प्रेम है, जाने सकल जहान
भाई बहना के लिये , देते अपनी जान।

पैसों से मत तोलिये, बहनों का संसार।
भ्रात – बहन का प्रेम है, राखी का त्योहार।

तिलक लगाकर हाथ में, धागे का ये साज
रिश्ता अरु रक्षा वचन, है राखी की लाज।-

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 28/08/2018

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