वो मुझे याद कर रही होगी

क्या आज फिर
वो मुझे याद कर रही होगी
मेरे लिए अपने केशो को संवार रही होगी
क्या आज फिर
वो अपने पायल को पॉलिश करवा रही होगी
माथे पे बंदी ,आँखो में काजल लगा रही होगी
क्या बार-बार आईने में खुद को निहार रही होगी
क्या उसे मेरी याद सता रही होगी
क्या आज फिर वो शर्मा कर
अपनी साड़ी की कोर को दांतों से चबा रही होगी
क्या रसोई में वो आज
कुछ नया पका रही होगी
मुझसे मिलन की जल्दी में
क्या वो घडी की सुईंयां आगे खिसका रही होगी
क्या आज फिर
वो मेरे पुराने कपड़ो में मेरी खुशबू तलाश रही होगी
कमरे में मोमबतियाँ जला-बुझा रही होगी
क्या आज फिर
वो मुझे याद कर रही होगी—अभिषेक राजहंस

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