अजीब रिश्ते – शिशिर मधुकर

अजीब रिश्ते हैं हम तो जिन्हें ना तोड़ पाते हैं
मुहब्बत देने वालों को ना संग में जोड़ पाते हैं

मोह माया के बन्धन तो सदा मजबूत होते हैं
इन्हें तेरे लिए अब तक नहीं हम छोड़ पाते हैं

एक तूफां पता है अब मेरे घर को उजाडेगा
चाह के भी दिशा उसकी नहीं हम मोड़ पाते हैं

शीशे के घरों में जब अधिकतर लोग रहते हैं
यही सब सोच के दीवार हम ना फोड़ पाते हैं

दिल की शिराओं में बसे हो तुम लहू बन के
इसी कारण इसे मधुकर न हम निचोड़ पाते हैं

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 30/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2018

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