मिलन कर लो – शिशिर मधुकर

सनम कुछ ही बरस बाकी हैं अब ये रूप ढलने में
मिलन कर लो बिता दो ज़िन्दगी या हाथ मलने में

एक क़दम आज तुम भर के सुकू दिल में बैठा लो
कभी ना चैन आएगा तुम को घुट घुट के जलने में

एक तरफ़ राह कांटों की एक तरफ़ फूल बिखरे हैं
छिलें ना अब चरण तेरे किसी भी रस्ते पे चलने में

ना परखो ज़िन्दगी को हर समय अपनी कसौटी पे
वरना रह जाओगे तुम तो यहाँ केवल सम्भलने में

आज भी ढल गया सूरज राह तकते हुए दिन भर
तूने तो रात कर डाली है मधुकर घर से निकलने में

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 29/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 31/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2018

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