ये कॉलेज का प्यार था

जाने कैसा ये बुखार था
ये कॉलेज के पहले दिन का प्यार था
ज्यादा दिन अभी हुआ नहीं
ये कुछ दो साल ही तो हुए होंगे
जब कुछ गेट-टूगेदर के बाद
सब क्लास में जाने लगे थे
कॉलेज की सीढियों पर ही
उनको देखा था मैंने
पहली नजर में ही हो गया था
ये कॉलेज के पहले दिन का प्यार था

अक्सर मौन हो कर मैं
चुपचाप उसे सुना करता था
जब भी कोई डिबेट हुआ करता था
जब भी वो चेहरे पर से अपने केशो को
हटाया करती थी
मैं एक-टक उसे निहारा करता था
पहली बार कॉलेज के गेट पर ही
उसने पूछा था मुझसे
कहाँ से आते हो तुम
मैं चाहता तो था कुछ कह दूँ
पर जुबां लड़खड़ा गए थे एकबारगी से
और वो खिलखिला गयी थी
हुआ उसी दिन उसकी मुस्कराहट से दीदार था
ये कॉलेज का प्यार था

हर सुबह जब भी घर से निकलता
बस यही सोचता आज कह दूंगा दिल की बात
पर पता नहीं क्या हो जाता था
मेरे लबो को
आज कॉलेज खत्म होने के बाद भी
कुछ नहीं कह पाया था
सोचा कई बार उसका मोबाइल नंबर मांग लूँ
पर हिम्मत अक्सर जबाब दे जाती थी
ये सोचकर की कहीं वो नाराज़ तो नहीं हो जायेगी
कम्बख़त दिल और जुबान की कभी बनी ही नहीं
दिल कहना कुछ और चाहता था
और जुबान कुछ और कह जाती थी
ये कॉलेज का प्यार था
कॉलेज तक का ही करार था—-अभिषेक राजहंस

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/08/2018

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