खुद की मुसीबत है – शिशिर मधुकर

लाख मिन्नत करीं मैंने ना वो नज़दीक आते हैं
हर समय दूर रहते हैं और दिल को दुखाते हैं

उसके बिन ज़िंदगी मेरी एक उजड़े चमन सी है
मगर वो कसमें वादे कोई भी अब ना निभाते हैं

मेरे नैनॊं को सूखा देख तसल्ली जो भी करते हों
अरे तन्हाइयों में वो ही तो बस मुझको रूलाते हैं

अगर सच्ची मुहब्बत है चाहे फिर कुछ भी हो जाए
अपने महबूब को किसी हाल में वो ना भुलाते हैं

किसी को दोष क्या देना ये तो खुद की मुसीबत है
वो मधुकर आज भी यादों में बस नीदें चुराते हैं

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. अंजली यादव Anjali yadav 20/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/08/2018

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