ll मन क्यूँ होता है उदास ll

भविष्य में पास पास हो हमारे नोज !

ऐ मन क्यूँ होता उदास, प्रात काल तकता है राह
निज की पीड़ा सह ले भीतर, जुबां पर न आने दे आह
जब तक जीवन की नाव चलेगी, दिवस रात्रि का चक्र चलेगा
सब प्राणी होंगे भोगी, चक्र सभी पर हावी रहेगा
हे मानव ! उदासी जब भी, तुम्हारा करे आलिंगन
उस एक शक्ति को याद करो, वश मे करो अपना मन
रात्रि की कालिमा छंट जाएगी, उदासी आप ही होगी दूर
उस परम शक्ति के होते हुए, कोई न हो सकता मजबूर
एकमात्र सहारा है उसका, कोई नहीं आएगा काम
मन की उदासी होगी दूर, अंतर से जपो उसका नाम
उस पर रखो विश्वास अटल, वह ही मात्र सहायक है
उदासी क्षण मे होगी दूर, वह खुशियों का कारक है

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2018
  2. अंजली यादव Anjali yadav 20/08/2018

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