लत लग गई – शिशिर मधुकर

मुझे लत लग गई तेरी बड़ी मुश्किल है जीने में
लबों के जाम छलका दे सुकू मिलता है पीने में

मेरे चेहरे को यूँ मत देख ये सच को ना बताएगा
दफन हैं कई उजड़ी बस्तियां इस छलनी सीने में

यूँ तो दुश्वारियां पल पल मुझे परेशान करती हैं
सताती हैं मगर बेचैनियां एक आलम से भीने में

तड़प का मेरी तुमको तो कभी अंदाज ना होगा
जैसे प्यासा रहे चातक कोई सावन महीने में

मुहब्बत का असर तेरी मेरी रग रग में पसरा है
महक चंदन की आती है मधुकर तेरे पसीने में

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/08/2018

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