मुझे ठोकरों में मिलाना

अब ना वो रंगे वफा दिल में

ना अब चाहतों का खजाना

बस दूर से देखते हैं

कितना बड़ा है मेरा ठिकाना

वो करती रही शिकायत

मेरे ख्वार होने की

कहाँ देख पाई उसकी नजरें

मेरा चुपके से लौट आना

वो छोड़ते नहीं अना से

दावतों पर मुझे बुलाना

मुझे अदब दस्तरख़ानों में

कहाँ आता है जाम लगाना

वो मासूम से बेक़सूर जालिम

चलाते हैं कत्लखाना

लौट आये बाकी था शायद

मुझे ठोकरों में मिलाना

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/08/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/08/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/08/2018

Leave a Reply