झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे

झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे ।
दासजू जागती पास अली परिहास करैँगी सबै उठि भोरे ।
सौँह तिहारी हौँ भाजि न जाऊँगी आई हौँ लाल तिहारे ही घोरे ।
केलि की रैन परी है घरीक गई करि जाहु दई के निहोरे ।

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