प्रेम की छाँव – शिशिर मधुकर

लोग मेरी मुहब्बत पे जाने क्यों तंज़ कसते हैं
जो भी सम्मान देते हैं वही तो दिल में बसते हैं

ज़ख्म देते रहे दिल पे नतीजा सामने है जब
अपनी कुंठा छुपाने को लोग अब मुझपे हँसते हैं

कोई दावा करे कुछ भी मुझे एहसास है इसका
मेघ जो भी गरजते हैं वो अक्सर ना बरसते हैं

प्रेम की छाँव जिन लोगों के सर से दूर रहती है
फ़कत तन्हाई के आलम में वो हरदम झुलसते हैं

उम्र का क्या करे कोई प्यास गर बुझ नहीं पाए
एक असल प्रेम पाने को लोग मधुकर तरसते हैं

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2018
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 11/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2018
  3. अंजली यादव अंजली यादव 13/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/08/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/08/2018

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