यही होता है जब – शिशिर मधुकर

चल के कुछ दूर जो हर बार वो पीछे को मुड़ते हैं
यही होता है जब आशिक दिलों के तार जुड़ते हैं

मेरी खुशियों के आलम का बयां होना नहीं मुमकिन
जिस समय आगोश में शर्मा के वो मेरे सिकुडते हैं

घरौंदे साथ में जो प्रेम के हमने मिलजुल बनाए थे
ज़माने को दिखाने को वो सब मुझसे ना तुड़ते हैं

मुहब्बत खुशियां देती है ये सच सबको पता है पर
दर्द की धार बहती है दिल जो मिलकर बिछुड़ते हैं

परिंदे साथ में मिलकर सफ़र लम्बे भी करते हैं
तन्हा होकर यहाँ मधुकर वो भी ऊँचे ना उड़ते हैं

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 11/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2018
  2. अंजली यादव अंजली यादव 13/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/08/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/08/2018

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