वो जो थी..

वो जो थी
ख्वाबो की दुनिया में
सच नहीं थी वो
और ना ही इस दुनिया में थी
उसका अक्श किसी दर्पण में कैद हुआ नहीं
कागज जला कर देखना चाहा उसे
उसका एहसास राख में भी मिला नहीं.

वो जो थी
ख्वाबो की दुनिया में ही दर्ज हो गयी थी
उसके नाम का लब्ज भी
किसी डायरी के पन्ने में मिला नहीं
जिक्र अक्सर करता था उसका
अपने ही ख्वाबगाह की दीवारों से
दीवारों ने शायद कुछ भी सुना नहीं.

वो जो थी
ख्वाबो की दुनिया में रह गयी
उस गुल के गुलशन में
महक जाना चाहता था
पर वो गुल बाग़ में खिला ही नहीं
वो चश्म में ही रह गयी थी
उसका साथ हकीकत बना ही नहीं–अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 05/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/08/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 06/08/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2018

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