जीने का मन करता है– शिशिर मधुकर

जब जब देखूं तेरी सूरत, जीने का मन करता है
जाम नशीले नज़र से तेरी,पीने का मन करता है

चोट अगर तुझको लग जाए,दर्द मुझे भी होता है
तेरी घाव को प्रेम से अपने, सीने का मन करता है

मैं प्यासा हूँ चातक जैसा, वर्षा जल को तरसा हूँ
जेठ की गर्मी में भी भादों, महीने का मन करता है

तुम और मैं हो और साथ में, मांझी की पतवार रहे
जीवन धार में ऐसे एक, सफीने का मन करता है

तुझको माना अपना खुदा, और मुसलमां बना हूँ मैं
सज़दा मधुकर करने को एक, मदीने का मन करता है

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2018

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