जाने कितनी जिंदगी

जाने कितने तूफ़ान बवंडर

खुद में दफनाता हूँ मैं

जब मेरी शरीके हयात

तुमसे मिलने आता हूँ मैं

यूँ तो खुशबू तुम्हारी

काफी है बहक जाने को

मद भरे लबों से पूछो की

कितना लड़खड़ाता हूँ मैं

जो तुम बाँहें अपनी

ड़ाल देती हो रेशम सी

जाने कितनी जिंदगी

एक बार में जी जाता हूँ मैं

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/08/2018
    • rakesh kumar Rakesh kumar 08/08/2018

Leave a Reply