पुष्प बेल – डी के निवातिया

पुष्प बेल

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मेरे आँगन में ख़ुशियाँ खिलखिलाती है
मन उपवन तितलियाँ सी फुरफुराती है
धरा सी माता नभ से पिता की छाँव में
बेटियों के रूप में पुष्प बेल लहलाती है !!

घर की मुंडेर चिड़ियों सी चहचहाती है
बनकर पुष्प-सुगंध आँगन महकाती है
पुलकित रहता है घर का कोना कोना
अपनी किलकारियों से मन हर्षाति है !!

दर्द समेटे जाने कितने,आह तक न आती है
मुसीबतो के पल कभी चेहरे न झलकाती है
पत्थरो सी कठोर बन चट्टानों सी अडिग रहे
रोती आँखों से हँसते-हँसते जीवन जी जाती है !!

डी के निवातिया

6 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/08/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/08/2018
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 02/08/2018
  4. अंजली यादव Anjali yadav 03/08/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 03/08/2018
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/08/2018

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