दोहे- Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)

 

जल संचित मिल कीजिये, होगा तब गुणगान
इनकी रक्षा आप करो, है पर्यावरण ज्ञान ।

दिल को दरिया मान लो, है जीवन का सार
जिस दरिया दिल प्रीत हो, होगा बेड़ा पार।

सुवह सवेरे जाइये, गंगा जी के तीर
होगा विशुध्द आचरण, दर्शन निर्मल नीर।

गंगा स्नान जो करे, मिट जाये सब पाप
शक्ति बड़ी सब जानते, दूर करे संताप।

पानी तो संसार में, बदले रंग व रूप
दरिया झरने झर रहे, नदियाँ पोखर कूप।

जल ही जीवन देत है , जल ही है संसार
जल दरिया की ओढनी , जल नदियाँ की धार।

हजम कर गया केकड़ा, माटी जल के साथ
उसके बच्चे बच गये, मौत चढ़ गयी माथ ।

बड़ी लगी है लालसा, बड़ी लगी है आस
मेहनत लगन साथ हो, तो बुझेगी प्यास।

निज मन भी तो झाँक लो, का करते हो आप
रखना ये एहसास तुम ,हो जाये ना पाप।

रावण हर के ले गया, सीता अपने साथ
बिधना का यह लेख है, या किस्मत की बात।

जो परखा वह ज्ञान है, ना परखा सो मूढ़
काली कबीर व तुलसी , मर्मज्ञ ज्ञानी गूढ़।

अलग तन एक जान है, जैसे सीता राम
शरणा गत हो जाइये, यही मोक्ष का धाम।

प्रीत सुखी संसार है, प्रीत बड़ा लाचार
जो दिल मिलता प्रीत से, तो जीवन गुलजार।

खन खन बजती चूड़ियाँ छन छन पायल जोर
छमक छमक सजनी चले, बाहर कितनी शोर।

जो भोले हैं प्यार से, उनको दीजै ज्ञान
तो रहेगी मानवता, कर उनका उत्थान।

नारी जननी रूप है, जाने सकल जहान
निंदा इनकी त्याग दें, करे नहीं अपमान।

कड़वा है तो क्या हुआ, गजब करेला नीम
गणों से है भरा हुआ, जाने बैद्य हकीम।

सुंदर रूप सुहावना, जैसे चंदा, मोर
उससे भी है गुण बड़ा,बिन बाती अंजोर।

5 Comments

  1. Abhishek Rajhans 30/07/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/07/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/08/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/08/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/08/2018

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