नई धारा का रुख – शिशिर मधुकर

तेरे संग जो भी रिश्ता है मुझे अब तोड़ना होगा
तेरे ख्वाबों में जीना भी मुझे अब छोड़ना होगा

मेरी रूह को सुकून खाली बातों से नहीं मिलता
मेरे असली दीवाने से ही खुद को जोड़ना होगा

कोई नदिया नहीं है पास और प्यासा मैं बैठा हूँ
नई धारा का रुख अपनी तरफ़ अब मोड़ना होगा

याद जिसकी लहू बन के मेरे दिल में समाई है
उसकी छवियां मिटाने को हिय निचोड़ना होगा

जो भी पत्थर मेरे जीवन में मुझको चोट देते हैं
उन्हें पहचान के मधुकर सभी को फोड़ना होगा

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2018

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