आयुष्य

परछाई थी
साए में छुपी रही
वो तो स्त्री थी

बोली नहीं वो
चुपके छोड़ दिया
वो जवानी थी

गुडिया गुड्डा
अपनी राह चले
वो बच्चे मेरे

बढ़ते रहे
बदलते हमेशा
सपने मेरे

रिंकी

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/07/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/07/2018
    • Rinki Raut Rinki Raut 30/07/2018
    • Rinki Raut Rinki Raut 01/08/2018
      • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/08/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 30/07/2018
  5. Abhishek Rajhans 30/07/2018

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