गीला गीला मौसम- शिशिर मधुकर

गीला गीला मौसम मन बेकल करता है
तेरा ये दीवाना तुझ पे हर पल मरता है

पेड़ों पे बादल की ज्यों बौछारें पड़ती हैं
प्रेम की वर्षा का पानी मुझ पे गिरता है

भूलना चाहा जिसकी बाहों के बंधन को
उसके ही सपनों में मनवा आके घिरता है

तू नज़रों से प्यार करे तो ऐसा लगता है
जैसे अपना जलन कोई चंदन से हरता है

तेरी प्रीत में असर बड़ा है मुझको एहसा है
रंग मेरे चेहरे का जिससे खूब संवरता है

वक्त ने हमको दूर किया है चैन ना आएगा
घाव हिज़्र का तो केवल मिलने से भरता है

हाथ में लेकर हाथ ना छोडूं सोच लिया मैंने
तेरी बदनामियों से पर मधुकर भी डरता है

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 23/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/07/2018
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 23/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/07/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/07/2018
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 24/07/2018
        • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/07/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/07/2018

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