मैं नर नहीं, मैं नारी नहीं

जैसे जन्म लेते हैं सब
मैंने भी तो कुछ ऐसे ही जन्म लिया हैं
हाँ ये सच है
ईश्वर ने ना मुझे नर बनाया
ना नारी बना पाया
तो क्या मैं इंसान भी नहीं.

क्या हुआ जो
मैं नर नहीं, मैं नारी नहीं
मैं तो जिया है ज़िन्दगी
चाहे जैसे भी जिया है
पेट की आग के लिए
जो भी किया गलत तो नहीं किया

ये जो नाम मिला है मुझे
किन्नर,हिजड़े या छक्के का
ये आखिर किसने दिया है
ये उसी समाज ने दिया है
जो दिन में मेरी मजबूरियों पर हँसा है
और रात को मेरा बलात्कार भी किया हैं

जैसे जन्म लेते है सब
मैंने भी तो जन्म लिया हैं
क्या किसी ने अपने जिस्म का सौदा
अपनी मर्जी से किया है
ये समाज ही है जिसने मजबूर किया है
आखिर अच्छा ही हैं
जो मैं इस तथाकथित समाज का हिस्सा नहीं
मैं नर नहीं,मैं नारी नहीं–अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. RAINY 20/07/2018
    • Abhishek Rajhans 20/07/2018
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/07/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 21/07/2018

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