तुम बेखबर थे – शिशिर मधुकर

नज़रें भी तुझसे ना मिलीं पर बात हो गई
तुम बेखबर थे फिर भी मुलाक़ात हो गई

दिन में तुम्हें तलाशा तो तुम शाम को दिखे
ज़ुल्फ़ें तेरी निहारते ही बस रात हो गई

सोचा था तेरा रूप रस हाथों में भर पियूँ
बादल मगर मचल गया लो बरसात हो गई

कितना गुरूर था मुझे अपने ईमान पर
तेरी झलक मेरे लिए पर खैरात हो गई

शतरंज का सा खेल है तेरा मेरा मिलन
चुके ज़रा रकीब से लो फिर मात हो गई

लो हट गईं रुकावटें बिना बात जो बनीं
उल्फ़त की फिर एक नई शुरुआत हो गई

मय्यत मेरी को देख के तुम भी जो रो दिए
मधुकर सफर जनाज़े का भी बरात हो गई

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 20/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 20/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018

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