सुनो ना बेटी..

सुनो ना बेटी
मेरी प्यारी बेटी
आज भले ना समझ पाओ मुझे
आज छोड़ गयी हो ना मुझे
मेरे बूढ़े होते हाथों से
कन्यादान का अधिकार भी छीन गयी ना
क्या-क्या सपने ना देखे तुम्हारे लिए
आखिर किसके लिए
अपने बाप को पराया कर गयी
उस अजनबी के लिए
जिसने दो पल मीठी बाते कर के
तुम्हे मजबूर कर दिया
तुम तो मेरे माथे की पगड़ी थी
मेरे कलेजे का टुकड़ा थी
फिर क्यों सब टुकड़ा-टुकड़ा कर दिया
तुम तो मेरे आँगन की तुलसी थी
आँगन में गूंजती किलकारी थी
कसूर क्या था मेरा बेटी
तुम्हे जन्म देना
बेटी बताओ ना

सुनो ना बेटी
तुम्हे शायद नहीं पता होगा
तुम्हारा जन्म लेना
किसी को भी मंजूर ना था
हर कोई चाहता था
तू जन्म ही ना ले
पर ये पाप था ना बेटी
तेरे माँ-बाबा ऐसा कैसे कर देते
तुम कली ही तो थी ना
जो फूल बनकर मेरे बाग़ में खिलने वाली थी
तुम मेरे शरीर की ना सही
मेरी आत्मा का हिस्सा तो थी
आज कोई बहका गया तुम्हे
और तुम बहक गयी
अपने बाप को पराया कर गयी
जो बूढी आँखे तुम्हे विदा करते हुए
फफक-फफक कर रोना चाहते थे
उनके आंसू तुम सुखा गयी
बेटी बताओ ना
तुम्हे जन्म देना पाप था ना–अभिषेक राजहंस

10 Comments

  1. ranvijay 29/07/2018
    • Abhishek Rajhans 30/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/07/2018
    • Abhishek Rajhans 30/07/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/07/2018
    • Abhishek Rajhans 30/07/2018
  4. अंजली यादव Anjali yadav 30/07/2018
    • Abhishek Rajhans 30/07/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 30/07/2018
    • Abhishek Rajhans 30/07/2018

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