बहुत रंग देखे हैं दुनिया में हमनें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बहुत रंग देखे हैं दुनिया में हमनें
गिरगिट के जैसे इंसा हो गया है।

कभी रंग गोरा कभी ये गेरुआ है
कलियुग में कैसे केचुआ हो गया है।

फर्ज और शिद्दत की बात कौन करता
लपेटे में युग का जुआ हो गया है।

भरोसा कहाँ है अब दुनिया में सब को
आदमी आज बे आसरा हो गया है।

सम्मान किसी का न संस्कार रहा अब
सत्य कर्मो से अपने जुदा हो रहा है।

रिश्तों के बीच बढ़ रही दूरियाँ अब
मोबाइल का जब से नशा हो गया है।

न प्रेम है उतना न मरौअत किसी पर
स्वार्थ के वश में सिरफिरा हो गया है।

नफरत ये रंजिश और ये गुस्ताखियाँ
ऐसे में कैसे किरकिरा हो गया है।

16 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/07/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 19/07/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/07/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/07/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 20/07/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
  8. Anjali yadav 21/07/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2018

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