सम्पूर्ण सौर मंडल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ग्रह – नक्षत्र, सम्पूर्ण सौर मंडल, अनन्त तारे
ब्रम्हांड में धूल – कण, और भरे ये गैस सारे ।
आकाश गंगा, अनन्त – अथाह ये भुगोल है
गुरुत्वाकर्षण का खेल, मध्य काला होल है ।
पृथ्वी – चन्द्र- सुक्र – शनि, मंगल बहुत छोटे हैं
सूर्य से विशाल – विशाल, तारे और भी मोटे हैं।
घूमते ग्रह धूरी पर अपने , न कभी ये टकराते हैं
गुरुत्वाकर्षण के कारण, गोल चक्कर लगाते हैं।
दिन – रात यही काम इनका, दशा – दिशा बदलता है
दिन – महीने – साल भी होते, जैसे – जैसे वह चलता हैं।
चलते – चलते एक सीध में होता, सूर्य – पृथ्वी – चंद्रमा
चन्द्र ग्रहण तब लग जाता उस पर, होता दिन पूर्णिमा।
जब चन्द्र, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरेगा
अमावस में ही ऐसी स्थिति, सूर्य ग्रहण कहलाएगा।

4 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/07/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/07/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/07/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/07/2018

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