अभी मंजिल मिली कहाँ..

यहाँ किसी को कहाँ
कुछ आसानी से मिलना है
नींद को टूटने दो आँखों से
सपनो को आँखों में ठहरना है

दुनिया का तो काम है कहना
वो तो कहते रहेंगे
तुम जो रुक गए एक बार तो
ये तुम्हे आगे बढ़ने ना देंगे

ये ज़िन्दगी है ना
ऐसे तो नहीं जीना है
मरने से पहले कुछ तो कर जाना है
जमीन से फलक तक छा जाना है

अभी तो सफ़र पे निकले हैं
मीलो आगे चलना है
अँधेरे को रोशन करने के लिए
दीया ले कर घर से निकलना है

कौन कहता है की
आग सिर्फ जलाता है
जला कर कुंदन भी तो बनाता है
सोने सा चमकाता है

मिट्टी में मिलने से पहले
कतरा कतरा बह जाना हैं
अभी मंजिल मिली कहाँ
अभी मीलो आगे चलते जाना है—अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/07/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/07/2018

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