हिज़्र की आग- शिशिर मधुकर

मुझे मालूम है मैं तो तेरी सांसों में बसती हूँ
यही वो राज़ है जिसको दबा मन में मैं हँसती हूँ

मधुर संगीत वीणा का अधिक मीठा ही होता है
तार रिश्तों के मानिंद जब अच्छे से कसती हूँ

ये चक्कर प्यार का तेरे मेरे हर ओर फैला है
निकलना चाहूँ भी मैं तो और भीतर को फंसती हूँ

मुहब्बत करने की फितरत मुझे मजबूर करती है
तन्हाई सह नहीं पाती मिलन को मैं तरसती हूँ

तुम ही तन्हा नहीं मधुकर हाल मेरा भी ऐसा है
हिज़्र की आग में तुम जान लो मैं भी झुलसती हूँ

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/07/2018
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 20/07/2018
        • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/07/2018

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