वाह रे बापू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

कोई इनको गांधी तो कोई
मन रखने को बापू कहता है
देश व्यापी सड़यंत्र में कोई
इनको ऐसे डाकू कहता है।

वाह रे नेहरू वाह रे गांधी
राजनीति में ये कैसी आंधी
स्वार्थ का था ये खेल तमाशा
गांधी व नेहरु मिल के तरासा ।

हमें पढाया गांधी के  चरखे

सत्याग्रह नमक आंदोलन करके
बात बड़ी थी पर करनी छोटी
चलती थी बस उनकी ही गोटी।

भूले क्यों प्रताप महाराणा
फीके पड़े अंग्रेजों का ताना
हंसते हंसते सब भूल गए थे
फांसी पर ऐसे झूल गये थे।

भगत सुखदेव और राजगुरु ने

आजादी लाने तूल गये थे
संग में इनके संगी साथी
एक ही रंग में धूल गये थे।

 

शेखर और शुभाष चन्द्र का

बलिदान ये अब अमर रहेगा
बीर सांवरकर लाला लाजपत

अंग्रेज को हरदम डर रहेगा।

 

रोशन सिंह अशफाक झूले थे

चाफेकर रामप्रसाद फांसी में
दहले अंग्रेज सूर्य सेन से

लक्ष्मी बाई की टक्कर झांसी में।

 

शहीद हुए थे अब कितने साथी

भारत की ये लाज बचाने में

सत सत नमन उनको है मेरा

कुर्बान हुए अंग्रेज हटाने में।

 

खून देकर हमनें लिए आजादी

बीर कुंवर सिंह वह प्रतापी था

जिसने इस देश को बांट दिया

वह गांधी ही इतना हावी था।

 

कैसी विडंबना लोक तंत्र की

हिन्दुओं को कायर बना दिया

कश्मीर हैदराबाद देकर

बल्लभ भाई को शायर बना दिया।

 

 

हद हुई दागी नाथूराम ने गोली

150 दलीलें एक एक करके बोली।
सत्य अहिंसा धोखा ही था जो

थी वह गुमराह करने की नीति।

 

भाष चंद्र के ममी से पूछो

आजादी को कैसे ये जीते

सारे लोग ही जाग गये थे

उन सब पर क्या नहीं थे बीते

जय हिंद जय भारत।

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/07/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 16/07/2018

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