याद तुम्हारी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

जैसे – जैसे याद तुम्हारी आती है
दूर चली जाती तो बड़ा सताती है।

लगता डर या कोई भूल भुलैया है
हर धड़कन मेरी  मुझे बताती है।

प्यार किया तमाशा या दिल चोरी है
ऐसे कैसे देख मुझे मुस्काती है।

आग में जैसे तन बदन मन जलते है
बेचैनी कैसी वह मुझे जगाती है।

होता नहीं इंतजार बोलो क्या करना
मैं आऊँ या फिर से तुम बुलाती है।

तेरी सूरत जान से प्यारी लगती है
हर अदा तेरी ऐसे मुझे लुभाती हैं।

तन्हा नहीं रह पायेगा बिन्दु याद करो
ऐसी सजा क्यों देकर आजमाती है।

बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)
बाढ़ – पटना

4 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 12/07/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/07/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/07/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/07/2018

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