यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर,
यह भोले जानवर ,
इंसान की नियत से बेखबर ,
यह मासूम जानवर .

घर पर तो लाते हैं,
बड़ा प्यार-दुलार देते हैं,
लेकिन जब निकल जाये मतलब,
तो सड़कों पर भटकने/मरने को छोड़ देते हैं.
ठगा सा रह जाता हैबेचारा जानवर .

मुस्लिम ईद मनाये ख़ुशी से ,
मगर बेचारे बकरे के हिस्से में मौत क्यों ?
कुर्बानी देनी हैं तो अपनी दो ,
इस बेजुबान से लेते हो कुर्बानी क्यों?
क्या तुम्हें ख़ुशी मनाने से रोकता है यह जानवर …

बरसों तक तुम्हें दूध देती रही ,
तुम्हारा/तुम्हारे परिवार का पोषण करती रही ,
उसके भूखे बच्चे का हिस्सा भी तुमने ले लिया,
मगर जब बूढी और लाचार हो गयी गौ माँ ,
तो उसे कसाई के हवाले कर दिया, क्यों ?
मालिक के स्वार्थ और लालच पर हैरान है यह जानवर …

अरे इंसान ! तेरे ज़ुल्मों की कोई इन्तेहा नहीं,
गली /सड़कों पर विचरते पशु /जीव ,
आते-जाते अपनी तेज़ रफ़्तार गाड़ियों से,
रोंद जाते हुए,कुचल देते हो,
तुम्हारी नज़र में कीड़े-मकोड़ों से कम नहीं.
वैसे भी कहाँ अपनी पूरी जिंदगी जीता है जानवर ..

तुमने कभी यह नहीं सोचा ,
की उनमें भी है परमात्मा का अंश ,
एक आत्मा ,जो उनमें भी है.
तुमने कभी नहीं सोचा ,
उनके जिस्म में है दिल और दिमाग ,
भले ही छोटा /अविकसित ही सही ,
तुम्हारी तरह वोह भी साँस लेते हैं,
अस्थि .मज्जा ,रक्त आदि से बना होता है जानवर …

कौन कहता है की उनमे समझ नहीं,
इंसानों से अधिक समझ वोह रखते हैं.
कौन कहता है उनमें ज़ज्बात नहीं,
इंसानों से ज़ायदा ज़ज्बाती वोह होते हैं.
इंसान तो इंसान होकर भी इंसान ना रहा अब,
मगर इंसान ना होते इंसानियत को समझता है जानवर…

कभी ख़ुशी के बहाने ,
कभी बलि के बहाने ,
की जाये वोह ह्त्या ही है.
जिव का त्याग करना ,
सड़कों में भटकने को छोड़ देना ,
यह उसके सम्मान / निस्वार्थ सेवा की
ह्त्या है.
किसी भी बहाने से की जाये बेशक .
ह्त्या तो ह्त्या ही है.
जंगल में रहने वाले जीवों का आखेट ,
यह भी हत्या है.
और उनकी ह्त्या के पश्चात उनके अनाथ नन्हे बच्चों
का बिलख-बिलख कर,भूखे मर जाना ,
तो सुनो इंसान ! यह तुम्हारे ज़मीर की ह्त्या है.
फिर खुद को खुदा की नज़र से गिराते हो क्यों ?
उसके बेजुबान ,मासूम संतान को सताते /मारते हो क्यों ?
दया करो इनपर,
अपना स्नेह/सरंक्षण दो इन्हें.
तुम्हारे प्यार / दुलार के भूखे हैंयह,
इस पृथ्वी पर स्वतंत्र /स्वछंदता से रहने
का है अधिकार इन्हें भी,
तो फिर यह जीव ह्त्या क्यों ?
तुमसे रहम की भीख /जीवन -दान मांगता है जानवर …

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/07/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/07/2018
  3. Onika Setia Onika Setia ''anu'' 14/07/2018

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