बद-गुमानी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.)

आपस में हुई जो बदगुमानी

मुश्किल है निबाह दोस्ती का

हफ़ीज़ जौनपुरी

(2.)

तुम रहे पाकसाफ़ दिल हर दम

मैं रहा सिर्फ़ बदगुमानी में

महावीर उत्तरांचली

(3.)

हिफ़ाज़त में वो देखे ग़ैर की तुझ को क़यामत है

कभी जो बदगुमानी से न हो कहता ख़ुदाहाफ़िज़

मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम

(4.)

मैं अपने दिल पे रख लेता हूँ तोहमत बदगुमानी की

अगर तेरी तरफ़ से बेरुख़ी महसूस करता हूँ

ऐश बर्नी

(5.)

थे ऐसी बदगुमानी में नहीं एहसास हो पाया

हमारी ही कहानी से निकाले जा चुके थे हम

सचिन शालिनी

(6.)

वही शख़्स लाउबाली हुआ मुंकिरहक़ीक़त

जिसे चिलमनों की साज़िश से मिली थी बदगुमानी

वफ़ा बराही

(7.)

एक पल में उठ गए पर्दे कई असरार से

वो न होता जो ज़रा सी बदगुमानी से हुआ

मुस्तफ़ा शहाब

(8.)

कमालमैं ने तो दर से दिए उठाए नहीं

उठाई उस ने ही दीवार बदगुमानी की

अब्दुल्लाह कमाल

(9.)

दमदम यूँ जो बदगुमानी है

कुछ तो आशिक़ की तुझ को चाह पड़ी

मीर असर

(10.)

बदगुमानी का दौर है आबिद

भाई है बदगुमान भाई से

आबिद वदूद

(11.)

जिस की उल्फ़त में दिल धड़कता है

अब तलक उस की बदगुमानी है

फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को

(12.)

साज़उल्फ़त छिड़ रहा है आँसुओं के साज़ पर

मुस्कुराए हम तो उन को बदगुमानी हो गई

जिगर मुरादाबादी

(13.)

मोहब्बत मेरी बढ़ कर आ गई है बदगुमानी तक!

मज़ा आ जाए हो जाएँ जो वो भी बदगुमाँ मुझ से

परवेज़ शाहिदी

(14.)

हमारे मयकदे का ख़ास ये दस्तूर है वाइज़

यहाँ आए तो बाहर बदगुमानी छोड़ आते हैं

उदय प्रताप सिंह

(15.)

बढ़ी है आपस में बदगुमानी मज़ा मोहब्बत का आ रहा है

हम उस के दिल को टटोलते हैं तो हम को वो आज़मा रहा है

हफ़ीज़ जौनपुरी

(16.)

बदगुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया

ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया

नज़ीर बनारसी

(17.)

बदगुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया

ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया

नज़ीर बनारसी

(18.)

वो गए घर ग़ैर के और याँ हमें दम भर के बाद

बदगुमानी उन के घर सू घर फिरा कर ले गई

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

(19.)

बड़ा इल्ज़ाम ठहरा है तअल्लुक़ रिश्तादारी का

क़राबत की मोहब्बत बदगुमानी होती जाती है

मुज़्तर ख़ैराबादी

(20.)

रखें हैं जी में मगर मुझ से बदगुमानी आप

जो मेरे हाथ से पीते नहीं हैं पानी आप

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

(21.)

कोई इज़हारनाख़ुशी भी नहीं

बदगुमानी सी बदगुमानी है

फ़िराक़ गोरखपुरी

(22.)

बिछड़ते वक़्त की उस एक बदगुमानी में

सदाएँ बह गई सब आँख ही के पानी में

रेनू नय्यर

(23.)

निगाहें बदगुमानी से कहाँ जाजा के लड़ती हैं

मिरी आँखों में हैं दुश्मन की बज़्मआराईयाँ क्याक्या

ज़हीर देहलवी

(24.)

बदगुमानी को मिरी और बढ़ा देता है

उन का ये कहना कि दामनकशअग़्यार न बन

फ़ितरत अंसारी

(25.)

पयरफ़बदगुमानी मैं वफ़ा बरत रहा था

मिरी पयपय वफ़ा से बढ़ी और बदगुमानी

अली जव्वाद ज़ैदी

(26.)

क़ुर्बतें फ़ासलों में बदलती रहीं

बदगुमानी हर इक मोड़ पर तेरे बिन

ख़्वाजा साजिद

(27)

मुझे कुश्ता देखा तो क़ातिल ने पूछा

यक़ीं है यहाँ बदगुमानी की सूरत

अनवर देहलवी

(28.)

कभी तो हम हैं यहाँ वहाँ के कभी तसव्वुर इधर उधर का

सुकूनराहत से क्या तअल्लुक़ कि बदगुमानी है और हम हैं

नूह नारवी

(29.)

दमदम कह बैठना बस जाओ अपनी उन के पास

क्यूँ नहीं जाती वो अब तक बदगुमानी आप की

इंशा अल्लाह ख़ान

(30.)

लाख हुस्नयक़ीं से बढ़ कर है

उन निगाहों की बदगुमानी भी

फ़िराक़ गोरखपुरी

(31.)

कहीं अग़्यार के ख़्वाबों में छुप छुप कर न जाते हों

वो पहलू में हैं लेकिन बदगुमानी अब भी होती है

अख़्तर शीरानी

(32.)

किया इम्तिहाँ मेरा सौ मारकों में

वही है मगर बदगुमानी तुम्हारी

रिन्द लखनवी

(33.)

बढ़ते क़दमों को फिर से ठिठकना पड़ा

आई फिर दरमियाँ बदगुमानी नई

क़ैसर ख़ालिद

(33.)

थी बदगुमानी अब उन्हें क्या इश्क़हूर की

जो आ के मरते दम मुझे सूरत दिखा गए

मोमिन ख़ाँ मोमिन

(34.)

बदगुमानी की फ़ज़ा में क्या सफ़ाई दें तुम्हें

इस फ़ज़ा में कोई भी हल मसअला होता नहीं

इब्नमुफ़्ती

(35.)

बुरा हो बदगुमानी का वो नामा ग़ैर का समझा

हमारे हाथ में तो परचाअख़बार था क्या था

परवीन उम्ममुश्ताक़

(साभार, संदर्भ: ‘कविताकोश’; ‘रेख़्ता’; ‘स्वर्गविभा’; ‘प्रतिलिपि’; ‘साहित्यकुंज’ आदि हिंदी वेबसाइट्स।)

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