न होना कभी जुदा ………

चाहत मेरी
बेगानी मुहब्बत
मेरी आशिकी
तुम्हारी इबादत
न होना कभी जुदा

न चाहो मुझे
ये तुम्हारी है मर्जी
मेरी दिल्लगी
है मेरी खुदगर्जी
न होना कभी जुदा

मंजिल नही
होने पाएं जुदाई
हो जाएं भले
जिंदगी की बिदाई
न होना कभी जुदा

तुम्हे क्या पता
क्या चाहत है मेरी
तुम्हे चाहना
ये आदत है मेरी
न होना कभी जुदा

भुला दो मुझे
या अपना बनालो
दो चार पल
हंस कर बितालो
न होना कभी जुदा

©शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/07/2018
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 11/07/2018

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