तकलीफ़—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.)

शहर में है इक ऐसी हस्ती

जिस को मिरी तकलीफ़ बड़ी है

राजेन्द्र नाथ रहबर

(2.)

बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते

यही उपहार देते रोज़ अपने

महावीर उत्तरांचली

(3.)

मेरे घर वाले भी तकलीफ़ में आ जाते हैं

मैं जो कुछ देर को आराम पहन लेता हूँ

फ़ैज़ ख़लीलाबादी

(4.)

ताचंद रस्मजामादरी की हिकायतें

तकलीफ़ यकतबस्सुमपिन्हाँ तो कीजिए

जोश मलीहाबादी

(5.)

हम ने भी तकलीफ़ उठाई है आख़िर

आप बुरा क्यूँ मानें सच्ची बातों का

समीना राजा

(6.)

हफ़ीज़अहलगुलिस्ताँ से हमारा हाल मत कहना

उन्हें ज़िक्रअसीरदाम से तकलीफ़ होती है

हफ़ीज़ बनारसी

(7.)

चंद क़तरों के लिए दरिया को क्यूँ तकलीफ़ दी

मेरी जानिब देख लेते मैं कोई सहरा न था

इक़बाल अशहर

(8.)

तू ही कर तकलीफ़ ओ पैकसबा

मुंतज़िर हैं वो मिरे पैग़ाम के

इस्माइल मेरठी

(9.)

अश्कग़म पीने में तकलीफ़ तो होती है मगर

सोचता हूँ कि मोहब्बत तिरी रुस्वा होगी

अंजुम सिद्दीक़ी

(10.)

किसी के इश्क़ में तकलीफ़ कुछ नहीं होती

किसी से चारघड़ी दिल लगा के देख न लो

मुज़्तर ख़ैराबादी

(11.)

और इक चोट दीजिए मुझ को!

मेरी तकलीफ़ नामुकम्मल है

साजिद असर

(12.)

हाल अहवाल क्या बताएँ हम

कोई तकलीफ़ है न राहत है

अब्दुल मन्नान समदी

(13.)

जाती हुई मय्यत देख के भी वल्लाह तुम उठ कर आ न सके

दो चार क़दम तो दुश्मन भी तकलीफ़ गवारा करते हैं

क़मर जलालाबादी

(14.)

सुराही का भरम खुलता न मेरी तिश्नगी होती

ज़रा तुम ने निगाहनाज़ को तकलीफ़ दी होती

क़ाबिल अजमेरी

(15.)

ज़ौक़तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर

आराम में है वो जो तकल्लुफ़ नहीं करता

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

(16.)

सख़्त तकलीफ़ उठाई है तुझे जानने में

इस लिए अब तुझे आराम से पहचानते हैं

फ़रहत एहसास

(17.)

जब कोई शख़्स कहीं ज़िक्रवफ़ा करता है

दिल को ऐ दोस्तो तकलीफ़ बड़ी होती है

अहमद राही

(18.)

और थोड़ी सी कीजिए तकलीफ़

दो क़दम पर ग़रीबख़ाना है

जिगर जालंधरी

(19.)

हवा सनके तो ख़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है

मिरे ग़म की बहारों को बड़ी तकलीफ़ होती है

अब्दुल हमीद अदम

(20.)

ज़ौक़तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर

आराम में है वो जो तकल्लुफ़ नहीं करता

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

(21.)

ऐ ताबबर्क़ थोड़ी सी तकलीफ़ और भी

कुछ रह गए हैं ख़ारख़सआशियाँ हनूज़

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

(22.)

साक़ी तुझे इक थोड़ी सी तकलीफ़ तो होगी

साग़र को ज़रा थाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

अब्दुल हमीद अदम

(23.)

नज़अ की और भी तकलीफ़ बढ़ा दी तुम ने

कुछ न बन आया तो आवाज़ सुना दी तुम ने

क़मर जलालवी

(24.)

दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ़ तो हुई

लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया

अज्ञात

(25.)

किसी का एहसान हम न लेंगे किसी को तकलीफ़ कुछ न देंगे

ख़ुदा ने पैदा किया है हम को ख़ुदा ही से इल्तिजा करेंगे

आग़ा हज्जू शरफ़

(26.)

ख़्वाजा ख़िज़्र सुनो हम कब से इस बस्ती में भटकते हैं

तुम को अगर तकलीफ़ न हो तो जंगल तक पहुँचा देना

इरफ़ान सिद्दीक़ी

(27.)

अँधेरे से ज़ियादा रौशनी तकलीफ़ देती है

ज़माने को मिरी ज़िंदादिली तकलीफ़ देती है

सहर महमूद

(28.)

दिल डूब न जाएँ प्यासों के तकलीफ़ ज़रा फ़रमा देना

ऐ दोस्त किसी मयख़ाने से कुछ ज़ीस्त का पानी ला देना

अब्दुल हमीद अदम

(29.)

इतना भी किसी दोस्त का दुश्मन न हो कोई

तकलीफ़ है उन के लिए आराम हमारा

कलीम आजिज़

(30.)

सुख़न की न तकलीफ़ हम से करो

लहू टपके है अब शिकायत के बाद

मीर तक़ी मीर

(31.)

सोच रहा हूँ किस के विष से होगी कम तकलीफ़

चारों और खड़े हैं मेरे रंगबिरंगे नाग

बाक़र नक़वी

(32.)

किसी से दिल लगाने में बड़ी तकलीफ़ होती है

नज़र की चोट खाने में बड़ी तकलीफ़ होती है

आसिम पीरज़ादा

(33.)

अय्यामख़िज़ाँ में ऐ बुलबुल तकलीफ़ बहुत बढ़ जाएगी

फूलों की क़सम देता हूँ तुझे छेड़ अब न तराना फूलों का

नूह नारवी

(34.)

दो घड़ी के वास्ते तकलीफ़ ग़ैरों को न दे

ख़ुद ही बैठे हैं तिरी महफ़िल से उठ जाने को हम

क़मर जलालवी

(35.)

छोड़ दे वो मुझे तकलीफ़ में मुमकिन तो नहीं

और अगर ऐसी कभी सूरतहाल आ जाए

अदीम हाशमी

(36.)

साक़ी तुझे इक थोड़ी सी तकलीफ़ तो होगी

साग़र को ज़रा थाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

अब्दुल हमीद अदम

(37.)

थोड़ी तकलीफ़ सही आने में

दो घड़ी बैठ के उठ जाइएगा

हक़ीर

(38.)

हम से बीमार भी जाँबर कहीं होते हैं मसीह

तुम यहाँ आ के न तकलीफ़ उठाना हरगिज़

मीर मेहदी मजरूह

(39.)

नहीं बीमार को तकलीफ़ ज़्यादा देते

अपनी आँखों को मिरे सामने इतना न झुकाओ

मीर मेहदी मजरूह

(40.)

मुआफ़ की है ख़ुदा ने ज़ईफ़ पर तकलीफ़

सितम किया अगर अब दस्तपा से काम लिया

इमदाद अली बहर

(41.)

हसरत अपनी अरमाँ अपना आज़ार अपना तकलीफ़ अपनी

हमदर्द बनी हमदर्द बना ग़मख़्वार हुई ग़मख़्वार हुआ

नूह नारवी

(42.)

पहुँचाई है तकलीफ़ बहुत पहले ही तुझ को

ऐ राहनुमा हाथ न अब थाम हमारा

अब्दुल हमीद अदम

(43.)

ज़र्फ़हिम्मत से सिवा दी नहीं जाती तकलीफ़

इतना ग़म देते हैं जितनी कि शकेबाई है

रियासत अली ताज

(44.)

चूर था ज़ख़्मों में और कहता था दिल

राहत इस तकलीफ़ में पाई बहुत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

(45.)

यारो हमें तकलीफ़ न दो सैरचमन की

आने दो बला से जो बहार आई है कमबख़्त

नज़ीर अकबराबादी

(46.)

सफ़र में हर क़दम रह रह के ये तकलीफ़ ही देते

बहरसूरत हमें इन आबलों को फोड़ देना था

अंजुम इरफ़ानी

(47.)

हो तकमीलहवस जिस दोस्ती का मुंतहा ऐ दिल

मुझे वो रस्मराहआशिक़ी तकलीफ़ देती है

सहर महमूद

(48.)

मैं चला जाता हूँ वाँ तकलीफ़ से

वो समझते हैं कि लासानी हूँ मैं

अब्दुल हमीद अदम

(49.)

तिरे बग़ैर कहाँ है सुकून क्या आराम

कहीं रहूँ मिरी तकलीफ़ बेघरी सी है

आसिम वास्ती

(50.)

इश्क़ की दुनिया में हर तकलीफ़ राहतख़ेज़ है

इज़्तिराबदिल भी इक हद तक सुकूँआमेज़ है

अकबर हैदरी

(51.)

सुब्ह चमन में उस को कहीं तकलीफ़हवा ले आई थी

रुख़ से गुल को मोल लिया क़ामत से सर्व ग़ुलाम किया

मीर तक़ी मीर

(साभार, संदर्भ: ‘कविताकोश’; ‘रेख़्ता’; ‘स्वर्गविभा’; ‘प्रतिलिपि’; ‘साहित्यकुंज’ आदि हिंदी वेबसाइट्स।)

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/07/2018

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